दक्षिण भारत के अधिकारों की लड़ाई तेज, CM विजय ने परिसीमन के खिलाफ विधानसभा में बजाया बिगुल

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अभिनेता से नेता बने थलपति विजय ने लोकसभा सीटों के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को तमिलनाडु विधानसभा में उनकी सरकार ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना के विरोध में एक अहम प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को स्थिर रखने और दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व की रक्षा करने की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री विजय का कहना है कि तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत के कई राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया है। ऐसे में केवल आबादी के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण किया गया तो इन राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
850 लोकसभा सीटों के प्रस्ताव का विरोध
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र की उस योजना का विरोध किया है, जिसके तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाने की चर्चा है। सरकार का तर्क है कि सीटों में बड़ा बदलाव उन राज्यों के लिए नुकसानदेह हो सकता है, जिन्होंने दशकों से जनसंख्या नियंत्रण को प्राथमिकता दी है।
प्रस्ताव में मांग की गई है कि लोकसभा की कुल सीटों की संख्या मौजूदा 543 पर ही स्थिर रखी जाए। राज्य सरकार का कहना है कि दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
महिला आरक्षण को लेकर भी विजय का रुख साफ
परिसीमन के साथ महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री विजय ने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने मांग की है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही दिया जाए।
विजय का कहना है कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए नए परिसीमन का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा बताते हुए जल्द लागू करने की मांग की है।
केंद्र के सामने रखी गईं चार प्रमुख मांगें
तमिलनाडु विधानसभा में पेश प्रस्ताव के जरिए राज्य सरकार ने केंद्र के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से लोकसभा की कुल सीटों को 543 पर स्थिर रखना, राज्यों के बीच मौजूदा प्रतिनिधित्व के अनुपात को बनाए रखना और आबादी तथा राज्यों के प्रतिनिधित्व के बीच वर्तमान अनुपात को बरकरार रखना शामिल है।
इसके अलावा राज्य सरकार ने महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग रखने और 2029 के लोकसभा चुनाव में मौजूदा 543 सीटों के आधार पर 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की है।
परिसीमन को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा पिछले कुछ समय से दक्षिणी राज्यों और केंद्र के बीच राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बना हुआ है। दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सीटों के पुनर्वितरण के कारण राजनीतिक नुकसान नहीं होना चाहिए।
विपक्षी दल भी महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग लागू करने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय की सरकार द्वारा प्रस्ताव लाए जाने से यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि देश में प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखते हुए ही भविष्य में परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए। अब इस प्रस्ताव के बाद केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।













